काफिला शायर
मैं वह कलम हूं तेरी तकदीर कa
जिसे तूने ना पाया
मैं वह फकीर हूं तेरी तकदीर का
जिसे तू ने सताया
href="https://blogger.googleusercontent.com/img/a/AVvXsEj4zDoxL_NfmVvr6_K3hUIZdTQs4UARjmXs6x8a4rxbZrRL8JyitbcmzCvCc11rnVIevTOfI9vmam2dXq1o-h57PEUX9nGHJRcll6Bn7WABnnrhf5ZFW4zrtLsZehern6DztfBXqscSqwlVOMViqx_SHZWlXcqEehu8uVkiMMyI3RKjduzhttNzEI-2=s789" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;">रांझणा गुलदार मिले आ तो सही तकदीर में मेरी
मैं वह राह था तेरa जिस पर तू ना चलाi
मैं वह पन्ना रहा जिस पर तेरaकलम ना चलाi
खो गया हूं अब ओझल सा कहे
ढूंढ ना पाओगे अब अपना सा कहीं
रांझणा तो खूब मिले पर मिलिया ना तो सा कोई
क्या पाया क्या खोया जिद में रहा ना अपन कोई
मैं वह कलम हूं तेरी तकदीर का
जिसे तू ना पाया
मैं वह फकीर हूं तेरी तकदीर काजिसे तू ने सताया
कांटे चुभे तो दर्द हुआ तुमने छोड़े तो बेदर्द हुआ
क्यों किया था बेगाना इश्क जो अपना ना हुआ
कहर तो तब भी छाया था जब हम छोटे थे
प्यार का खूबसूरत अफसाना वहीं से सीखे थे
पता था एक दिन आओगी तुम ,शर्माते शर्माते
घुंघट की आड में मेरे पास, मुस्कुराते मुस्कुराते
मैं वह चांद हूं जिसका चांदनी है तू
मैं वह कलम हूं जिसकी स्याही है तू
फिर क्यों है दूरियां अपनों में, फिर क्यों है क्यों है क्यों है क्यों है क्यों है क्यों है.......😡😠😥😘😍🤗............ अपनों मेसच्चे लफ्ज कभी डगमग आते नहीं https://drive.google.com/file/d/1VX-xJp4yA4rneyTLSipVFuOQffkE88N8/view?usp=sharing
दूरियां कितनी भी, जज़्बात बदलते नहीं
अरमान है गहरा समुंदर का
चाहूं तुझे इतना की चाहे ना कोई उतनाआरजू है बड़ा संसार का
चाहूं तुझे इन्ना सारा 🤷चाहे ना को इन्ना सारा🙆
रंग बदलती दुनिया है रंग बदलते लोग
पर तुम ना बदलना यार कभी plz. ऐसे ही मेरी यादों में रहना मेरे ख्वाबों में रहना मेरी बातों में रहना मेरी कविता में रहना मेरी कहानी में रहना मेरे जीवन में रहना
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